परिचय
पल्टु विषहरा थारू (चौधरान) वंशावली के परिचय
(वोद्यमाइझ, शिवराम चौ०+ हेवकी, देवकी, हृदय महेश)
आदरणिय सम्पूर्ण वंशावली परिवार के सव गोरे मे हार्दिक स-धन्यवाद के साथ सर्वप्रथम "पल्टु विषहरा वंशावली" केन्द्रीय कार्य समिति के तरफ से गोर लागें चियै । आई "पल्टु विषहरा वंशावली" नमाकरण कथिले के लिये त ? वास्तानमे पूर्वज जानैबला व्यक्तित्व सवके खोज अनुसन्धान पहिचान के आधारमे पहिले वृजः पितामह श्री पल्टु परिहत गोष्टी द्वारा बुढुवा अग्रज सव कैहै छेले तर छलफल करत अगाडी पछाडी पहिचान के क्रममे परिहथ खानदान (चिचु परिहत) अलगे खानदान वंशावली भेलाके कारण से परिहत शब्द हट्याल गेलै । आव एल "विषहारा शब्द "वास्तुव मे येकरा साधारण बोली भाषामे विषहरिया शब्दावली से चिन्हल जाइछै त विषहैरिया कथी ?
धर्म परम्परा संस्कृत और पहिचान के आधार मे हमरौरके पूर्वज पुर्खा- सव धामी धम्पैन पुजा आजा और विशेष त जब ककरो नाग वा साँप धैर लेलकै त गहवरमे आइन के विष झारैवाला काम प्रख्यात रूप मे करै छेलै और जब सुक्खा रौदी हैछलै त नाग पंचमीमे (झाइल मिर्दङ्ग और भगैत के साथ) मोइह लग्या के पाइन बर्षा के बारेमे धामीया गहवरिया से वचन ल्याके सन्तुष्ट है छ्यल और जव कोशी, त्रियुगा, वलान, कमला मौहली लगायत यी नदी सबमे बाइर से ग्रसित है छ्याल त मोहइके वचन से कौवला पाती कैरके अलग या दोसर धार, ठाम काइम कराइ छ्याल त यि विविध शक्ति के प्रतिक रूप अन्तरगत धामी धम्पैन से चिन्हल और साँप के विषहरण के उदाहरणिय रूप विषहर नामाकरण भेलै ।
अन्त मे वंशावली नामाकरण श्री पल्टु विषहरा "वंशावली अन्तरगत बृज पितामह: "पल्टु विषहरा" के नाम से परिवर्तन करल गेल। यैसे पहिले प्रथम बैठक पडरियामे >बौध माइझ शिवराम चौधरी नाम प्रस्तावित भेल छेल लेकिन राम माइझ + वली माइझ दुइटा बेटा के अलग पक्ष पहिचान के कारण तरमे आइबके आठौं पिढी राम माइझ पक्षके "बोध माइझ शिवराम चौधरी" और बली माझ्झ पक्ष के "हेवकी, देवकी, ह्रदय और महेश पटवारी" आठौं पिंढी मे जोरलाके कारण वृहत छलफल के बाद पूर्वज पुर्खा सब श्री "पल्टु विषहारा" वंशावली (वोद्यमाइझ, शिवराम चौधरी + हेवकी, देवकी हृदय, महेश) नामाकरण केलक । धन्यवाद !
पल्टु चाौधरान
बाधमाईझ शिवराम चौधरी हेवकी,देवकी,हृदय ,महेश प्रतिष्टान वार्षिक सधारण सभा
मिति :-२०७७ उदघटनशत्र मिति:- २०७७/०९/१६गते विहिवार
स्थान बोदे बार्साईन न.पा.८काचन सप्तरी अयोजक भुवनेश्वर चौधरी केन्द्र सल्लाहकार
अध्यक्ष :- रौदी चौधरी केन्द्रीय अध्यक्ष । महासचिव :- शुभनारायण चौधरी , केन्द्रीय सल्लाहकार :- इन्द्रदेव चौधरी
सप्तरी जिल्ला अध्यक्ष सत्यनारायण चौधरी
कार्यक्रम संचालक एवं स्वगत मन्तव्य महासचिव शुभनारायण चौधरी गर्नुभएको आयव्यय तथा कार्यप्रगति प्रस्तुतिकरण गर्नुभएको र निर्णयभएको ।
सम्पन्न कार्य सम्पन्न :- उपस्थित भद्र भलाद्मी प्रतिष्ठती व्यकति र काचन गाउँमा जेष्ठ प्रतिष्ठानका सदस्यहरु मध्येबाट सम्मानित गरेको करिब २० जना ।
समापन्न:- अध्यक्ष रौदी चौधरी ज्युबाट मन्तव्य र समापन्न गरियो ।
आयोजक तथा व्यवस्थापन :- केन्द्रीय सल्लाहकार श्री भुवनेश्वर चौधरी निजनिवास काचन गाउको घरमा सहभागी :- सप्तरी ,सिरहा,सुनसरी ,मोरड्गबाट ७०-८०जना सहभागी रहेको।
वंशावली विकास क्रमके संक्षिप्त इतिहास
२०५५ साल पडरिया मिन्टिग भेलै तहै मिन्टिग पास भेलै दियादि समेलन करलजा तेकरे बदैलत २०५६/११/१२-१३ गते सिरहाके पडरियामे सम्पन्नभेल वंशावलिके महासम्मेलनमे अपन वंशावलिके आदमी कोइयो हेऱ्याल -भुतिय्याल छुटल बरहल,तर उपर उल्टि -पुल्टि भेलहा गम्भिर समस्यासबके निवारणके लेल सबकोइ एकठाम बैठके छलफल, विचारविमर्श, कर्त-वितर्क,लिखित तथा मैखिक गोष्टि प्रमाण के अधारपे सबके चितबूझदो तरिकासे सबके समस्याके समाधान भ्याल रहै । वंशावलिके नाम किटान करैले बहुत तर्क-वितर्क आ छलफल करलाकेवाद वंशावलिके नाम " बोधमाइझ- शिवराम चौधरी सर्वसम्मतसे पारीत भेल रहै । तै दुवारे यी सम्मेलन वंशावलिके प्रथम ऐतिहासिक महासम्मेलन छेलै ।क्षेत्रगत हिसाबसे कोनो क्षेत्रमे "बोधमाइझ -शिवराम चौधरी " के नामसे प्रख्यात छैत कोनो क्षेत्रमे "हेवकिदेवकि हृदय महेश " के नामसे प्रख्यात वा जानैछै । महज वंशावलिके यी दुनु अलग अलग छोरके आठमे पुस्ताके प्रख्यात व्यत्किसब चियै । सम्मेलन सम्पन्न भेलाके बादमे विभिन्न तर्क -वितर्क या छलफल बौहौत दिनतक जारिये रहलै । फलस्वरूप दोसर सम्मेलनके संघारमे आइवके केन्द्रिय समितिके मिटिन्ड्ग बैठके विभिन्न तर्क-वितर्ककेसाथ वंशावलिके नाम सहिढंगसे उपयुत्क नै देखल जाइछै कैहके कमिटिके मिटिगंमे वंशावलिके नयॅा नामके प्रस्ताव पास कैरके निर्णय ल्यासकने छेलै । फलस्वरूप सुनसरिके धमौरा मे मिति २०६२ चैत ४-५ गते राखलगेल वंशावलिके दोसर सम्मेलन वंशावलिके संसोधित नाम "पल्टु विषहरा थारू चौधरान " पारित भ्याके अनुमोदन करलगेलै । योहो बेरका शंसोधित नाम जन समुदायमे पूर्णरूपसे सुखद- संतुष्टि दैले नै सकलकै तैयोमे नवगठित समितिसब सकृयताके साथ २०६६ सालमे प्रथम संस्करणके वंशावलि किताब छप्याके घर-घरमे ज्याके वितरण कैनेछेलै ।
विभिन्न तर्क-वितर्क या पक्ष-विपक्षके हिसाबसे समय बितैतगेलै । तैयोभि यैहनगे वातावरणमे रैहके उदयपुरके तपेस्वरी बेल्हामे मिति २०६९ चैत १०-११ गते वंशावलिके तेसर सम्मेलन भी सम्पूर्ण संख्याके क्षेत्रगत आंसिक उपस्थितिमे सम्पन्न भेलै ।वादविवाद या मन-मोटावके बावजुद छः वर्षके वादमे असन्तुष्ट पक्षके सकृयता या अगुवाइमे मिति २०७५चैत १५-१६ गतेके दिन सप्तरीके पोखरिया बसानपटीमे बढिभव्यताके साथ वंशावलिके चारिम सम्मेलन सम्पन्न भेलरहै । सम्मेलनके मुख्य उदे्श्य रहै - सैबप्रकारके मनमोटावके छोइरके एकतामे ऐक्यवद्धता लावनाई अर्थात मेलमिलाप करनाइ । यै बेरका उपस्थितिसे सकारात्मक समर्थन त भेलै लेकिन मनसे पुर्ण स्वीकृत नै देलकै अर्थात उदेश्यके पूर्णता प्राप्त नै भेलै । तैयो अपेक्षाकृत यै बेरका वंशावलिके संशोधित नाम "पल्टु चौधरान "
(बौधमाइझ, शिवराम चौधरी, हेवकि-देवकि,हृदय, महेश) पारित भेलै । नवगठित वर्तमान केन्द्रीय मुल समिति वर्षदिनके भितरे २०७६आसिनमे वंशावलिके नामसे प्रतिष्ठानके दर्ता कराइनेछै । प्रतिष्ठानके केन्द्रीय कार्यलय सप्तरीके महैलिया मे रहलछै । अपसोचके वात यी छै कि जे स्थापित प्रतिष्ठानके वंशावलि विकास लेल बहुत ऐजेण्डा सब प्रस्तुत भ्यारहलछै ।जै मे सबसेबेसि सबकोइ उठान विषय रहै "दोसर संसकरण के वंशावलि कितब प्रकाशन करनाइ" । यै कामके वास्ते सबसे पहिले करेवला काम डाटा संकलन करनाइ ये चियै । महज येह्या मुख्यकाम वहुत धिमिगतिमे रहलै । यै समिति के समयवधि समाप्त भ्यगेलै । वंशावलिके पॅाचम सम्मेलन करैके समय भ्यगेलाके वजह से किताब छपाइ के काम करैले यी समिति नै सकलकै । फलत तत्कालिन कार्यकारणि समितिके सात वर्ष पुरा भ्यागेलाके वादमे मिति २०८३साल बैशाख ११ गतेके दिन उदयपुर जिल्ला के वेलता न.पा. -२ वेल्हामे वंशावलि के सम्मेलन सम्पन्न भव्यताके साथ भलै । भव्वतु सब्ब मंगलम ।
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गौरवका प्रतिक - भिक्खु नन्दबोधी
शिवशंकर चौधरी
चौदण्डीगडी नं.पा.१०.उदयपुर
आजभन्दा २५०० वर्ष अगाडि भगवान बुद्धले प्रतिपादन गर्नु भएको मार्गम प्रशिक्षित र दीक्षित हुनु भएको पल्टु विषहरा चौधरान वंशवलि परिवार मा जन्मिने पहिलो व्यत्कित्वको नाम हो "भिक्खु नन्दबोधी" ।उहॅाको गृहथि नाम हो " रौदी चौधरी थारू " उहॅा एक सामान्य परिवारमा जन्मिनु भइ आफ्नो जिवनमा कठिन भन्दा कठिन परिस्थिति पार गर्दै यहॅासम्म आइ पुग्न भएको एक जुझारू व्यत्कित्व हो । उहॅाको जन्म हाल लहान न.पा.वडा १५ शोभापुर गाउॅमा पिता सुकल चौधरी थारू माता सोनिया देवी थरूनीको एक्लो पुत्रको रूपमा भएको हो ।उहॅाको जन्म मिति २०१६ पौष १५ गते रहेको छ । उहॅा जन्मनु भएको नाम सबुर लाल रखेको थियो । तर तियो सालमा। अत्यन्तै भिषण खडेरी करणले (रौदी) लागेको हॅुदा उहॅाको गाउलेहरू रौदी रौदी गर्दै नाम रौदी परीयो । तर उसको नाउमा सानै उमेरमा जग्गा नाममा बुबाले गरि दिएको थियो ।तर स्कुलमा नाम लिखाउदा तेहॅा रतन प्रसाद लेख दियो । उहॅाको गरिबी जिवन र परम्परा गलत धारणा कारण स्कुली शिक्षा पाउन सक्नु भएन । उहॅा अहिले साधारण लेखपढ गर्न मात्र जन्नु भएको छ । उहॅा एक परिश्रमी, श्रृजनशील उधमी र खेतिपाती गरेर बस्ने एक सफल कृषक हुनुहुन्थियो ।सामाजिक सेवाको भावनाले सामाजिक संघ संस्था पनि संचालन गरे चलाउनु भएको थियो ।
हाल उहॅा बुद्ध शिक्षाबाट प्रेरित उहॅा आफ्नो जीवनको उतरार्द्धमा पटक पटक गरी जम्मा पॅाच पटक अल्पकालिन प्रव्रज्या शिविरमा सहभागी भएर बौद्ध आचरणको शिक्षा लिनु भएको छ । अल्पकालिन प्रव्रज्याको कार्यक्रम सकाएर घर फर्किदाको बखत पनि उहॅा सधै गेरूवा वस्त्रको पहिरनमै रहेर भिक्खुहरूले पालन गर्ने अष्टशीलको परिपालना गरेर भिक्खुको जिवन जिउने मनमा उत्कृत अभिलाषा बोकनु भएको थियो । त्यहि क्रमा गत वर्ष २०८१ सालको वर्षावासको समयमा फेरी बौद्ध विहारमा गई चिवर धारण गरी श्रामणेरको दीक्षा लिई भिक्खु सरहको जिवनमा रहि वर्षावासको समय विताउनु भएको थियो । वर्षावासको समय अवधि तिन महिनाको हुन्छ । वर्षावासको समय बितिसकेर पनि उहॅा धर्मस्थलि बौद्ध विहार काठमाडौंमैबाट लुम्बिनि थाई विहारमा थाई गुरूबाट उपसम्पदा को दिक्षा लिईको मिति २०८१/११/२६ उपसम्मदा लिइ भिक्खु पद प्राप्त गर्नु भयो ।यहि उपसम्पदाको दीक्षा लिदाखेरी उहॅा नाम परिवर्तण गरी भिक्खु नन्दबोधि नाम राखियो ।गुरूको निर्देशनमा उहॅा अहिले पनि धर्मस्थलि बौद्ध विहारमै रहनु भएको छ । अर्को खुशि खवर यो छ कि , यहि आउदो १५ डिसेम्बर सन् २०२५ मा केहि दिनको लागी बौद्ध अध्यणको लागी उहॅाको थाईल्याण्ड भ्रमण निश्चित भएको छ । उहॅाको उतरोतर उज्वल भविष्य लागी हार्दिक शुभकामना व्यक्त गर्न चाहन्छु ।
उहॅाको यहि लगनशीलता र धैर्यताका साथ आफ्नो अठोटमा गठित वंशावली समितिमा पनि उहॅा सर्वसम्त निर्विरोध निर्वचित अध्यक्ष पदको लागी चुनिन भएर अहिले व
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